व्हाट्सएप ने हैकर्स, स्कैमर्स और एडवांस्ड साइबर अटैक्स से बचाव के लिए एक नया सिक्योरिटी फीचर पेश किया है। इस फीचर का नाम है स्ट्रिक्ट अकाउंट सेटिंग्स (Strict Account Settings)। यह खास तौर पर उन लोगों के लिए बनाया गया है जो ज्यादा खतरे में रहते हैं, जैसे पत्रकार, सामाजिक कार्यकर्ता, एक्टिविस्ट और पब्लिक फिगर्स।
यह फीचर एक तरह का ‘लॉकडाउन मोड’ है, जो Apple के Lockdown Mode और Google के Advanced Protection जैसा काम करता है। बस एक टैप से कई हाई-लेवल सिक्योरिटी ऑप्शन्स ऑन हो जाते हैं।
इस फीचर की मुख्य खासियतें क्या हैं?
- वन-टैप से सुरक्षा चालू: सेटिंग्स में जाकर Privacy > Advanced में जाकर ‘Strict Account Settings’ को ऑन करें। बस इतना ही, और आपका अकाउंट सबसे सख्त सुरक्षा मोड में चला जाएगा।
- अनजान लोगों से मीडिया ब्लॉक: आपके कॉन्टैक्ट्स लिस्ट में न होने वाले नंबरों से आने वाली फोटो, वीडियो, डॉक्यूमेंट्स या कोई भी अटैचमेंट अपने आप ब्लॉक हो जाएंगे। इससे स्पाईवेयर या मैलवेयर का खतरा बहुत कम हो जाता है।
- लिंक प्रीव्यू बंद: चैट में कोई लिंक आएगा तो उसका प्रीव्यू (थंबनेल) नहीं दिखेगा। इससे संदिग्ध लिंक्स से ट्रैकिंग या हैकिंग का जोखिम घटता है।
- अनजान कॉल्स साइलेंट: अज्ञात नंबरों से आने वाली कॉल्स अपने आप साइलेंट हो जाएंगी, ताकि आपको परेशान न करें।
- अन्य सख्त सेटिंग्स: टू-स्टेप वेरिफिकेशन (2FA) अपने आप ऑन हो जाता है, सिक्योरिटी नोटिफिकेशन्स लॉक हो जाते हैं, प्रोफाइल की लास्ट सीन, ऑनलाइन स्टेटस, फोटो और अबाउट सिर्फ कॉन्टैक्ट्स को दिखाई देते हैं।
यह फीचर धीरे-धीरे सभी यूजर्स के लिए रोल आउट हो रहा है। इसे इस्तेमाल करने के लिए व्हाट्सएप का लेटेस्ट वर्जन अपडेट करना जरूरी है। आने वाले कुछ हफ्तों में यह सबके फोन में आ जाएगा।
क्यों लाया गया यह फीचर?
व्हाट्सएप का कहना है कि ज्यादातर यूजर्स के लिए नॉर्मल एंड-टू-एंड इंक्रिप्शन काफी सुरक्षित है, लेकिन कुछ खास लोग (जैसे पत्रकार या पब्लिक फिगर्स) सोफिस्टिकेटेड साइबर अटैक्स का शिकार हो सकते हैं। ऐसे में यह एक्स्ट्रा लेयर प्रोटेक्शन देता है।
मेटा (व्हाट्सएप की पैरेंट कंपनी) अब Apple और Google के बाद तीसरी बड़ी टेक कंपनी बन गई है, जो ऐसे हाई-लेवल सिक्योरिटी मोड दे रही है।
बैकग्राउंड में विवाद
यह अपडेट ऐसे समय आया है जब भारत, ऑस्ट्रेलिया और ब्राजील के कुछ यूजर्स ने अमेरिकी कोर्ट में मेटा के खिलाफ केस किया है। आरोप है कि कंपनी प्राइवेट चैट्स को स्टोर और एनालाइज करती है। मेटा ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है और कहा है कि व्हाट्सएप सिग्नल प्रोटोकॉल पर आधारित एंड-टू-एंड इंक्रिप्शन यूज करता है, जिससे कंपनी खुद भी मैसेज नहीं पढ़ सकती।
यह नया फीचर यूजर्स को प्राइवेसी और सिक्योरिटी पर भरोसा दिलाने की कोशिश माना जा रहा है।
अगर आप भी ज्यादा सिक्योर रहना चाहते हैं, तो जल्दी अपडेट चेक करें और इस फीचर को ट्राई करें!