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हैदराबाद: तेलंगाना की कुल 3.70 करोड़ जनसंख्या में पिछड़ा वर्ग (मुस्लिम अल्पसंख्यकों को छोड़कर) 46.25 प्रतिशत के साथ सबसे बड़ा वर्ग है। राज्य में हाल ही में हुई जाति सर्वेक्षण रिपोर्ट के अनुसार, पिछड़ा वर्ग के बाद अनुसूचित जाति (17.43 प्रतिशत), अनुसूचित जनजाति (10.45 प्रतिशत), मुस्लिम अल्पसंख्यकों में पिछड़ा वर्ग (10.08 प्रतिशत) और अन्य जातियां (13.31 प्रतिशत) हैं। वहीं, मुस्लिम (ओसी) की जनसंख्या 2.48 प्रतिशत है।
यह सर्वेक्षण राज्य योजना विभाग द्वारा किया गया था, जिसकी रिपोर्ट नागरिक आपूर्ति मंत्री एन. उत्तम कुमार रेड्डी की अध्यक्षता वाली कैबिनेट उपसमिति को रविवार को सौंपी गई। मंत्री ने बताया कि यह रिपोर्ट 4 फरवरी को राज्य कैबिनेट के सामने पेश की जाएगी और उसी दिन इसे विधानसभा के विशेष सत्र में बहस के लिए रखा जाएगा।
संख्याओं के हिसाब से अनुसूचित जाति की जनसंख्या 61,84,319, अनुसूचित जनजाति की 37,05,929, मुस्लिम अल्पसंख्यकों को छोड़कर पिछड़ा वर्ग की 1,64,09,179, मुस्लिम अल्पसंख्यकों में पिछड़ा वर्ग की 35,76,588 और मुस्लिम (ओसी) की 8,80,424 है।
कुल मिलाकर राज्य में मुस्लिम जनसंख्या का प्रतिशत 12.56 है। तेलंगाना में कुल 1,15,78,457 घरों में से 1,12,15,134 घरों का सर्वेक्षण किया गया। राज्य में पिछड़े मुस्लिमों को पिछड़ा वर्ग श्रेणी में आरक्षण दिया जाता है।
मंत्री ने इस रिपोर्ट को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि सर्वेक्षण के दौरान 3,54,77,554 व्यक्तियों (96.9 प्रतिशत जनसंख्या) को कवर किया गया। लगभग 3.1 प्रतिशत (16 लाख) लोग इस सर्वे में शामिल नहीं हो सके क्योंकि वे या तो उपलब्ध नहीं थे या सर्वेक्षण में भाग लेने के इच्छुक नहीं थे।
उन्होंने कहा कि यह रिपोर्ट और इसे तैयार करने की प्रक्रिया तेलंगाना सरकार की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है, जो देश के सामाजिक इतिहास में दर्ज होगी।
इस सर्वेक्षण के जरिए तेलंगाना के गरीब, कमजोर और हाशिए पर खड़े वर्गों को सामाजिक, आर्थिक, शैक्षिक और राजनीतिक क्षेत्रों में डेटा आधारित कल्याणकारी योजनाओं और अवसरों का लाभ मिलेगा।
कांग्रेस सरकार का यह व्यापक सामाजिक-आर्थिक, रोजगार, राजनीतिक और जातिगत सर्वेक्षण कांग्रेस नेता राहुल गांधी के चुनावी वादे के तहत किया गया था। यह सर्वेक्षण 6 नवंबर 2024 से 50 दिनों तक चला।