भारत ने हाल ही में अमेरिका के नेतृत्व वाले पैक्स सिलिका (Pax Silica) नाम के एक महत्वपूर्ण गठबंधन में शामिल होने का फैसला किया है। यह गठबंधन दुनिया की टेक्नोलॉजी और सप्लाई चेन को मजबूत बनाने के लिए बनाया गया है। स्रोतों के मुताबिक, इस कदम से भारत को टेक क्षेत्र में नई ताकत मिलेगी और चीन पर निर्भरता कम होगी। आइए जानते हैं इसकी पूरी कहानी सरल भाषा में।
पैक्स सिलिका क्या है और इसका मकसद क्या?
पैक्स सिलिका एक अंतरराष्ट्रीय समूह है जो 12 दिसंबर 2025 को अमेरिका ने शुरू किया था। इसका पहला सम्मेलन वाशिंगटन डीसी में हुआ। मुख्य मकसद है महत्वपूर्ण खनिजों (क्रिटिकल मिनरल्स) जैसे सिलिका, लिथियम, कोबाल्ट और 17 तरह के रेयर अर्थ एलिमेंट्स की सप्लाई चेन को सुरक्षित और सस्ता बनाना। ये खनिज आधुनिक दुनिया के लिए बहुत जरूरी हैं क्योंकि इनसे इलेक्ट्रिक कारें, स्मार्टफोन, कंप्यूटर, एलईडी लाइट्स, विंड एनर्जी के मोटर, मिसाइल, एयरोस्पेस और रक्षा उपकरण बनते हैं।
वर्तमान में इन खनिजों पर चीन का 60% से 85% तक कब्जा है। अमेरिका और उसके दोस्त देश चीन के इस दबदबे को कम करना चाहते हैं ताकि किसी संकट में सप्लाई रुक न जाए। इससे वैश्विक टेक ऑर्डर को नई दिशा मिलेगी।

शामिल देश और उनकी भूमिका
इस गठबंधन में अमेरिका के अलावा जापान, दक्षिण कोरिया, सिंगापुर, ऑस्ट्रेलिया, नीदरलैंड, ब्रिटेन, इजरायल, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और अब भारत शामिल हैं। हर देश की अपनी खासियत है:
- जापान और दक्षिण कोरिया: सेमीकंडक्टर बनाने में माहिर।
- नीदरलैंड: उन्नत मशीनें बनाते हैं जो चिप्स के लिए जरूरी हैं।
- ऑस्ट्रेलिया: इन खनिजों के बड़े भंडार हैं।
- सिंगापुर: सामान भेजने-लेने का बड़ा केंद्र।
- UAE और इजरायल: AI और नई तकनीकों में आगे।
ये देश मिलकर सप्लाई चेन को मजबूत बनाएंगे और एक-दूसरे की मदद करेंगे।
भारत क्यों शामिल हुआ और क्या फायदे होंगे?
शुरुआत में भारत को इसके कम भंडार और एडवांस्ड टेक की कमी के कारण नहीं बुलाया गया था। लेकिन अब भारत की भूमिका चीन को संतुलित करने में महत्वपूर्ण मानी गई है। भारत के शामिल होने से:
- भारत के सेमीकंडक्टर और AI मिशन को मजबूती मिलेगी। हमारी अपनी चिप्स और AI तकनीक विकसित होगी।
- अमेरिका से निवेश आएगा, जिससे GPU और डेटा सेंटर्स बनेंगे। इससे अमेरिका पर निर्भरता कम होगी और भारत खुद मजबूत बनेगा।
- चीन पर सप्लाई चेन की निर्भरता घटेगी, जिससे भारत की अंतरराष्ट्रीय छवि बेहतर होगी।
इसके अलावा, विशेषज्ञों का कहना है कि यह गठबंधन भारत की अर्थव्यवस्था को बूस्ट देगा। आने वाले सालों में हजारों नौकरियां पैदा होंगी और टेक निर्यात बढ़ेगा। उदाहरण के लिए, भारत अब रेयर अर्थ एलिमेंट्स की खोज और प्रोसेसिंग में निवेश बढ़ा सकता है, जो पहले चीन से आते थे।

क्रिटिकल मिनरल्स क्यों इतने जरूरी?
ये खनिज आधुनिक जीवन की रीढ़ हैं। बिना इनके EV कारें, स्मार्ट डिवाइस या रक्षा उपकरण नहीं बन सकते। दुनिया तेजी से ग्रीन एनर्जी की तरफ जा रही है, इसलिए इनकी मांग और बढ़ेगी। पैक्स सिलिका से ये सुरक्षित रहेंगे और सभी देशों को फायदा होगा।
यह कदम भारत के लिए एक नई शुरुआत है, जो हमें वैश्विक टेक लीडर बनाने में मदद करेगा।
